कलम से ✍️ : बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी आंदोलन ने सोमवार को एक नया मोड़ ले लिया जब प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे...
कलम से ✍️ : बांग्लादेश में आरक्षण विरोधी आंदोलन ने सोमवार को एक नया मोड़ ले लिया जब प्रधानमंत्री शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया और देश छोड़कर भागने को मजबूर हो गईं। लंबे समय से चले आ रहे इस आंदोलन ने अब हिंसक रूप ले लिया है, जिससे देश की राजधानी ढाका समेत कई हिस्सों में कानून-व्यवस्था चरमरा गई है।
शेख हसीना का इस्तीफा अचानक आया जब आंदोलनकारियों ने ढाका में प्रधानमंत्री निवास पर धावा बोल दिया। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि हसीना को अपना विदाई भाषण बीच में छोड़कर जान बचाकर भागना पड़ा। सरकारी आवास पर धावा बोलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने वहां से महंगे गिफ्ट और सामान लूट लिए।
बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र 'प्रोथोम आलो' के अनुसार, इस्तीफा देने के बाद शेख हसीना अपनी बहन रेहाना के साथ मिलिट्री हेलीकॉप्टर से भारत रवाना हो गईं। यह इस्तीफा उस समय आया जब सेना ने हसीना को 45 मिनट का अल्टीमेटम दिया था।
इस राजनीतिक संकट के बीच सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वाकर-उज-जमां ने शांति की अपील की है। उन्होंने कहा कि अब देश को अंतरिम सरकार चलाएगी। इस संबंध में सेना और प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के बीच एक बैठक भी हुई है।
आंदोलन की शुरुआत आरक्षण नीति के खिलाफ हुई थी, जो अब तक 300 से अधिक लोगों की जान ले चुकी है। पिछले सप्ताहांत पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 100 लोग मारे गए और 1,000 से अधिक घायल हो गए।
बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की मूर्ति को तोड़ने से आंदोलनकारियों का गुस्सा और बढ़ गया। गृहमंत्री के घर और सत्ताधारी पार्टी के कार्यालय को आग के हवाले कर दिया गया।
देश में जारी इस राजनीतिक संकट के कारण अब बांग्लादेश में सत्ता का भविष्य अनिश्चित है। अंतरिम सरकार के गठन के बाद उम्मीद है कि स्थिति सामान्य होगी और शांति बहाली के प्रयास सफल होंगे।
No comments